कानपुर (ब्यूरो) जानकारी करने पर एजेेंसी को पता चला कि चकेरी के एक संस्थान से चाणक्यपुरी वाले मतांतरण स्थल के लिए फंड आता था। इस फंड से ही किराया, मतांतरण कराने वालों को लाने ले जाने का खर्च, खाने पीने का खर्च, बिजली पानी का खर्च, रिफ्रेशमेंट का खर्च और तमाम सारे वे खर्चे किए जाते थे, जो मतांतरण में खर्च होते थे। वहीं जो एजेंट झांसा देकर लोगों को आते थे उन्हें भी कमीशन दिया जाता था। एक बात का और खुलासा हुआ है कि जो लोग मतांतरण के लिए लोगों को बहला फुसला कर लाते थे, उनका न तो मतांतरण किया जाता था और न ही उन पर कोई दबाव था।
एक दर्जन से ज्यादा संस्थाएं
मामले में जांच कर रहे पुलिसकर्मियों की मानें तो मुंबई गई टीम को एक दर्जन से ज्यादा संस्थाओं को नाम मिले हैैं, जो कानपुर और आस पास स्थित हैैं। रूरल एरियाज में और कम पढ़ी लिखी आबादी वाले इलाकों में रहने वालों का मतांतरण कराना इनका टारगेट होता है। सूत्रों के मुताबिक इनके गैैंग में महिलाएं भी शामिल हैैं। जो लोगों को आसानी से अपने जाल में फांस लेती हैैं। कई अस्पतालों में मौजूद स्टाफ भी चोरी छिपे मतांतरण गैैंग की मदद करने के लिए तैयार रहता है। प्रयागराज और फतेहपुर के मामलों में जांच कर रही टीमों को ये पता भी चल गया कि कहां से मतांतरण की शुरुआत हो रही है। कानपुर और घाटमपुर पुलिस इस मामले में प्रयास कर रही है।
मतांतरण के लिए होने वाली फंडिंग की जानकारी मिली है, जल्द ही बड़ा खुलासा होगा।
बीपी जोगदण्ड, पुलिस कमिश्नर कानपुर कमिश्नरेट