एक नजर स्विस सिटी पर
मुंबई का झावेरी बाजार आभूषणों की दुकानों के लिए लोकप्रिय है, तो दिल्ली के चांदनी चौक में साडिय़ों के सैकड़ों व्यापारी मिल जाएंगे. इसी तरह स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख शहर की गली-गली अपनी गोपनीयता के लिए विश्वविख्यात स्विस बैंकों से भरी है.
बैंक स्ट्रीट के नाम से जानी जाने वाली इस गली के दोनों ओर बैंकों के कार्यालय है. इन्हें देख कर सचमुच लगता है कि ज्यूरिख को बैंकों का शहर कहना कोई गलत नहीं है. वैसे इन बैंकों के बारे में भारत में लोगों की राय कुछ अच्छी नहीं है क्योंकि लोगों की धारणा है कि देश की काली कमाई का मजा ये बैंक ही लूट रहे हैं.
हालांकि भारत के तंग बाजारों की तुलना में स्विट्जरलैंड की बैंक सडक़ काफी आधुनिक दिखाई देती है. यहां शीशे की इमारते हैं. इनकी विख्यात गोपनीयता के कारण यह गली कर चोरों की सैरगाह भी मानी जाती है.
टाप सीक्रेट है सब कुछ
इन बैंकों में गोपनीयता का स्तर काफी ऊंचा है. किसी भी ग्राहक के खाते के बारे में जानकारी पाना आसान नहीं है. दुनियाभर में उद्यमी और राजनीतिज्ञ कर बचाने के लिए अपना पैसा यहां जमा कराते हैं.
छोटे से लेकर बड़े हर व्यक्ति में ज्यूरिख के बैंक लोकप्रिय हैं. दुनिया में स्विटजरलैंड के बैंकों को अपनी गोपनीयता के लिए पहचाना जाता है. कानूनी तौर पर ये बैंक अपने ग्राहकों की किसी भी जानकारी को गोपनीय रखने को प्रतिबद्ध हैं. केवल किसी ग्राहक के खिलाफ आपराधिक मामले के प्रकाश में आने की स्थिति में ही इस गोपनीयता को तोड़ा जाता है.
कोई भी संघीय सरकार या एजेंसी सामान्य परिस्थितियों में इन बैंकों के खातों की जानकारी हासिल नहीं कर सकती है. इनके लोकप्रिय नंबर वाले खातों में खातेधारक को सिर्फ नंबर से जाना जाता है. इसके अलावा ये बैंक उच्च सुरक्षा वाले लॉकरों की पेशकश भी करते हैं.
बदल रही है स्थिति
हालांकि, अब स्थिति कुछ बदलती दिख रही है. कई देशों की सरकारें स्विट्जरलैंड से अपने नागरिकों के खातों के बारे में जानकारी पाने के लिए बात कर रही हैं. भारत ने भी हाल में स्विट्जरलैंड के साथ दोहरा कराधान बचाव संधि के संशोधित प्रोटोकाल पर दस्तखत किए हैं.
हालांकि इस करार पर दस्तखत काफी पहले हो चुके हैं, पर भारत को अनुमोदित दस्तावेज के लिए 100 दिन का इंतजार करना होगा. इसके बाद स्विट्जरलैंड और भारत के बीच पत्रों का आदान प्रदान होगा. 100 दिन की यह सीमा छह अक्तूबर को समाप्त हो रही है.
भारत ने कल स्विट्जरलैंड के साथ वित्तीय वार्ता पर सहमति ज्ञापन एमओयू पर दस्तखत किए हैं. इससे दोनों देशों के कर विभागों के बीच सहयोग बढ़ाया जा सकेगा.
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