भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्‍तेमाल पर कार कंपनी फॉक्‍सवैगन ने कहा कि सरकार इस पर जोर तो बहुत दे रही है लेकिन सिर्फ इससे बात नहीं बनेगी। इसके लिए चार्जिंग पॉइंट्स का नेटवर्क सहित बहुत सारे बेसिक काम करने पड़ेंगे। इस नजर से देखेंगे तो भारत का बाजार अभी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए तैयार नहीं दिखता।


शहरों में तेजी से बढ़ रहा प्रदूषणदेश की राजधानी नई दिल्ली सहित सभी बड़े शहरों में तेजी से प्रदूषण बढ़ रहा है। यही वजह है कि सरकार के एजेंडे में इलेक्ट्रिक वाहन हैं लेकिन सिर्फ एजेंडा से बात नहीं बनती। इसके लिए जरूरी है कि बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सरकार तेजी से काम करे। चार्जिंग पॉइंट्स के नेटवर्क बिछाए जाएं। साथ ही खराब बैटरियों के रिसाइकिलिंग के लिए भी काम करना होगा। नहीं तो बाद में वह भी एक बड़ी समस्या बन जाएगी। अकसर ऐसा देखने में आता है कि कोई तकनीक आनन-फानन में अपना तो ली जाती है लेकिन बाद में उसके साइड इफेक्ट पर ध्यान नहीं दिया जाता और मौजूदा समस्या को खत्म करने की तकनीक भविष्य में एक और बड़ी समस्या उपहार में दे जाती है। इसलिए चार्जिंग के साथ ही खराब बैटरियों के रिसाइकिलिंग पर भी ध्यान देना होगा।


2022 तक 16 जगहों बनेंगे वाहन

फॉक्सवैगन ने कहा कि उसकी योजना व्यापाक तौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रोडक्शन करने की है। 2022 के अंत तक कंपनी 16 स्थानों पर प्रोडक्शन करने लगेगी। ये सभी वाहन बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन होंगे। कंपनी के भारतीय परिचालन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एंड्रियास लौयरमन ने कहा, 'मेरा मानना है कि सरकार का इसे (इलेक्ट्रिक वाहन) अपने एजेंडा में रखना एक अच्छा कदम है। यह भारत के लिए एक बेहद आवश्यक है। उनसे भारत में कंपनी की इलेक्ट्रिक वाहन योजनाओं को लेकर सवाल किया गया था। भारत में कई बड़ी कंपनियों ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर काम शुरू कर दिया है, जिस तरह से देश में (शहरों में) प्रदुषण लगातार बढ़ रहा है, उस लिहाज से इलेक्ट्रिक वाहन आने ही चाइये।

Posted By: Satyendra Kumar Singh