- सिटी के 60 एरिया हर साल झेलते हैं जल जमाव की प्रॉब्लम

- कागज में बनती है योजनाएं, नहीं होता जमीन पर काम

GORAKHPUR : बारिश की फुहारें पड़ते ही इंदिरा नगर में रहने वाले शर्मा जी परेशान हो जाते हैं। जरा सी बारिश में ही उनके घर के सामने वाली रोड लबालब हो जाती है और सारा काम ठप हो जाता है। ये हाल सिर्फ इंदिरा नगर या एक-दो मोहल्लों का नहीं है। पूरे शहर में नगर निगम ने वाटर लॉगिंग वाले एरियाज को चिन्हित कर रखा है, लेकिन वहां की समस्या दूर करने की कोई कोशिश आज तक नहीं की गई। इन एरियाज में वाटर लॉगिंग का एक बड़ा कारण टूटी हुई सड़कें हैं जिनके गड्ढों में पानी भर जाता है और सड़कें नाले में तब्दील हो जाती हैं। मॉनसून दस्तक देने वाला है। ऐसे में इस बार फिर इन एरियाज में मॉनसून की खुशी के साथ-साथ खौफ भी है कि फिर कहीं अपना मोहल्ला डूब न जाए।

भौगोलिक स्थिति के चलते लगता है पानी

नगर निगम के आंकड़ों की मानें तो शहर में कुल 60 जगहों पर जलजमाव होता है। चौंकाने वाली बात ये है कि वाटर लॉगिंग से निपटने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं करता। कुछ एरियाज की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि वहां जरा सी बारिश में पानी लग जाता है। ये सिटी के निचले इलाकों में आते हैं।

- मुक्तेश्वर नाथ मंदिर

- महेवा गांव

- भैंसाखाना तुर्कमानपुर

- खरैया पोखरा

- अभनंदन इंटर कॉलेज के पास

- रामजानकी नगर

- जंगलमातादीन

- अशोक नगर

- रसूलपुर अजय नगर भट्ठा

- दरिया चक

- जंगल मातादीन व सरस्वतीपुरम

- अशोक नगर

- रसूलपुर भठ्ठा

- अजय नगर भठ्ठा

- सिद्धार्थनगर कॉलोनी

- बगहा बाबा मंदिर स्थान

यहां लापरवाही से लगता है जल जमाव

सिटी के कई एरिया ऐसे हैं, जहां नगर निगम की लापरवाही के कारण जल जमाव होता है। यहां जल निकासी के लिए कागज में ही नाले बनाए जाते हैं और कागजों में ही सफाई होती है। इन एरियाज में बारिश होते ही जल जमाव होने लगता है।

- धर्मपुर

- हड़हवा फाटक

- हड़हवा फाटक धोबीघाट

- राम नगर चौराहे

- इंजीनियरिंग कॉलेज

- धर्मशाला बाजार

पॉश एरियाज का भी बुरा हाल

इन एरियाज की गिनती तो पॉश एरियाज में होती है, लेकिन बारिश के वक्त यहां की स्थिति नारकीय हो जाती है।

- सूर्य विहार

- इंदिरा नगर

- बेतियाहाता दक्षिणी

- गंगा नगर और प्रताप नगर

- विष्णु मंदिर

बोटिंग क्लब बन जाते हैं ये एरियाज

सिटी के कई एरियाज में तो तेज बारिश में इतना पानी लग जाता है कि आसानी से नाव चलाई?जा सके। बांध के किनारे के हिस्से पिपरापुर और बहरामपुर में तेज बारिश में सड़कों पर 3 से 4 फीट तक पानी जमा हो जाता है। 2013 की बारिश में पिपरापुर के लगभग सभी घरों में पानी घुस गया था। हालात इतने खराब?थे कि स्थानीय लोग प्रशासन से नाव की मांग करने लगे थे। प्रशासन ने तत्काल पानी निकालने के लिए और पंपिग सेट की संख्या बढ़ाई, तब जाकर 36 घंटे में पानी निकाला जा सका था।

Posted By: Inextlive